13 नवंबर, 2011 को हुए UPTET पेपर 2 (Social Studies) में स्टूडेंट्स को न सिर्फ़ पॉलिटिकल साइंस, हिस्ट्री और जियोग्राफी के सवाल दिए गए, बल्कि नए टीचर एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया के हिसाब से कॉन्सेप्ट्स की अपनी समझ को टेस्ट करने का मौका भी दिया गया। यह पेपर उन कैंडिडेट्स के लिए एक मेज़रमेंट टेस्ट के तौर पर काम आया जो ऊपर बताए गए सब्जेक्ट्स में अपनी काबिलियत दिखाना चाहते थे और प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों में टीचर बनने के लिए क्वालिफ़ाई करना चाहते थे।
एग्जाम के नज़रिए से, सोशल स्टडीज़ सेक्शन में स्टूडेंट्स की सोशल स्ट्रक्चर, इकोनॉमिक नज़रिए और पॉलिटिकल इंस्टीट्यूशन्स की समझ को टेस्ट करने की कोशिश की गई। इसके लिए न सिर्फ़ फैक्ट्स की जानकारी बल्कि एक एनालिटिकल अप्रोच की भी ज़रूरत थी—जैसे, हिस्टोरिकल घटनाओं के कारण और नतीजे, ज्योग्राफिकल कंडीशन्स का सोशल इम्पैक्ट, और आसान एविडेंस-बेस्ड सवाल। इसलिए, कैंडिडेट्स को अपनी तैयारी के दौरान टाइम मैनेजमेंट, सब्जेक्ट एनालिसिस और कॉन्सेप्चुअल समझ पर खास ध्यान देना था।
