बाल विकास और शिक्षा शास्त्र एक शिक्षक को यह समझने में सहायता करता है कि बच्चे किस प्रकार सीखते, समझते और अपने वातावरण के साथ तालमेल बिठाते हैं। यह विषय शिक्षण प्रक्रिया के उन सिद्धांतों पर आधारित है जो प्रत्येक बच्चे की विशिष्टता और उसकी सीखने की गति को महत्व देते हैं। इस खंड में पूछे जाने वाले प्रश्न शिक्षक की मनोवैज्ञानिक समझ और कक्षा प्रबंधन क्षमता को परखते हैं।
CTET परीक्षा में यह खंड बच्चों के संज्ञानात्मक, सामाजिक, भावनात्मक और भाषाई विकास से संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाओं को शामिल करता है। अध्यायों में पियाजे, व्यगोत्स्की, कोहल्बर्ग जैसे मनोवैज्ञानिकों के सिद्धांतों से जुड़े प्रश्न आते हैं, जो वास्तविक कक्षा शिक्षण में अत्यंत उपयोगी होते हैं। इस प्रश्नपत्र का अध्ययन शिक्षक को विद्यार्थियों की सीखने की आवश्यकताओं को प्रभावी रूप से समझने में मदद करता है।
